अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में Silver की कीमतों में तेज़ उतार-चढ़ाव जारी है और अब कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में इसमें बड़ी गिरावट देखी जा सकती है। हाल ही में COMEX पर सिल्वर का रेट तेज गिरावट के बाद करीब 63.90 डॉलर प्रति औंस के आसपास आया, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
रिकॉर्ड हाई से तेज़ करेक्शन
2025 में चांदी ने जबरदस्त रैली दिखाकर नया रिकॉर्ड बनाया था। COMEX पर सिल्वर फ्यूचर्स सितंबर 2025 में लगभग 46.42 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुए थे, जो इस चक्र का एक बड़ा शीर्ष माना गया। 2020 में कोविड के समय यह कीमत 12.12 डॉलर प्रति औंस तक गिर गई थी, यानी कुछ ही सालों में चांदी ने कई गुना उछाल दिखाया और अब इसी रैली से तेज़ करेक्शन का खतरा भी बढ़ गया है।
Read More : GTL Infrastructure share price target 2026, 2028, 2030, 2032, 2034, 2035…
भारत में Silver की कीमतों की चाल
भारतीय बाज़ार में 1 किलो चांदी की कीमत 2025 में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचकर करीब 2.62 लाख रुपये तक चली गई थी। इसके बाद दिसंबर 2025 के आख़िर में इसमें लगभग 4,000 रुपये की गिरावट के साथ भाव करीब 2,58,000 रुपये प्रति किलो पर आ गए। साल 2025 में ही चांदी ने भारत में लगभग 185% से अधिक रिटर्न दिए, जबकि 1 जनवरी 2025 को इसका स्तर लगभग 90,500 रुपये प्रति किलो के आसपास था।
Read More : बाजार बंद होने के बाद Power PSU कंपनी ने किया बड़ा ऐलान! ₹367,00,00,000 नया सोलर प्लांट शुरू…
75–80% तक गिरावट की डरावनी भविष्यवाणी
कुछ कमोडिटी एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अगर चांदी में लंबे समय की तेज़ी के बाद गहरी मंदी का फेज शुरू होता है, तो यह अपने रिकॉर्ड हाई से 75–80% तक लुढ़क सकती है। ऐसे परिदृश्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यदि चांदी ने लगभग 120 डॉलर प्रति औंस के आस-पास हाई बनाया है, तो अत्यधिक खराब स्थिति में यह 25–30 डॉलर प्रति औंस के ज़ोन तक फिसलने का रिस्क पैदा कर सकती है। इसी तरह भारतीय बाज़ार में 2.60 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास के रिकॉर्ड स्तर से 75% गिरावट का मतलब होगा कि भाव 65,000–70,000 रुपये प्रति किलो के दायरे तक दबाव में आ सकते हैं, हालाँकि यह एक सैद्धांतिक अनुमान है, न कि किसी गारंटीशुदा स्तर की पुष्टि।
गिरावट के संभावित कारण
ऐसी भारी गिरावट की आशंका के पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं। अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था में इंडस्ट्रियल मांग धीमी होती है, रियल इंटरेस्ट रेट बढ़ते हैं और डॉलर इंडेक्स मज़बूत होता है, तो चांदी जैसे कमोडिटी पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही यदि निवेशक सेफ हेवन के रूप में गोल्ड को ज़्यादा तरजीह देने लगें और कमोडिटी फंड्स में आउटफ्लो तेज़ हो जाए, तो Silver में बिकवाली और बढ़ सकती है
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।






