US Tariff : 7 फरवरी को अमेरिका ने भारत से आने वाले कई ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स पर लगने वाला ऊंचा टैरिफ घटाने पर सहमति दी है। नया रेट करीब 18 प्रतिशत के आसपास बताया जा रहा है, जो पहले लगभग 50 फीसदी तक चला गया था, इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स की कॉस्ट कम होगी और मार्जिन बढ़ सकते हैं।
भारत फोर्ज पर असर (US Tariff)
भारत फोर्ज की करीब 22 प्रतिशत बिक्री अमेरिका से आती है और कुल अमेरिका महाद्वीप से एक‑तिहाई से ज्यादा रेवेन्यू मिलता है। कंपनी क्लास‑8 ट्रक और ऑटो पार्ट्स के लिए फोर्जिंग सप्लाई करती है, जिन पर पहले ऊंचे टैरिफ से दबाव था। टैरिफ कम होने से इसके अमेरिकी ग्राहकों के लिए प्राइस फिर से आकर्षक होंगे, जिससे ऑर्डर बुक और मार्जिन दोनों में सुधार की संभावना बनती है।
Read More : पूरी तरह कर्ज मुक्त होने वाली है TATA Group की ये कंपनी! 8 गुना उछला मुनाफा, FIIs भी बढ़ाये हिस्सेदारी….
सोना BLW प्रिसीजन फोर्जिंग्स का एक्सपोर्ट डेटा
सोना BLW की लगभग 43 प्रतिशत रेवेन्यू अमेरिका से जुड़ी मानी जाती थी, जिस पर पहले लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ से कुछ हिस्से पर रिस्क बना था। कंपनी का ऑर्डर बुक 2025 के अंत में करीब 2.42 लाख करोड़ रुपये था, जो FY25 की रेवेन्यू का लगभग 6.8 गुना है और इसमें 77 प्रतिशत ऑर्डर EV सेगमेंट से आते हैं। टैरिफ कट के बाद कंपनी के लिए नए अमेरिकी ऑर्डर लेना और मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स पर मार्जिन बचाना आसान हो सकता है, खासकर तब जबकि उसने हाल ही में अमेरिका में 1,520 करोड़ रुपये का बड़ा नया ऑर्डर भी हासिल किया है जो FY26 की चौथी तिमाही से प्रोडक्शन में आएगा।
Read More : 5 साल में 16,000% से अधिक रिटर्न देने वाली कंपनी में फिर तुफानी तेजी! 10% उछला भाव, Multibagger…
सम्वर्द्धना मदरसन (SAMIL) और US बिजनेस
सम्वर्द्धना मदरसन इंटरनेशनल की कुल रेवेन्यू का लगभग 19 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका से आता है, जिसमें से करीब 90 प्रतिशत USMCA कॉम्प्लायंट है। कंपनी के पास अमेरिका में लगभग 25 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं, इसलिए इसका बड़ा हिस्सा पहले से ही लोकल या मैक्सिको के जरिये सप्लाई होता है और टैरिफ का असर सीमित रहता है। फिर भी टैरिफ रेट घटने से इसके भारतीय प्लांट से होने वाले करीब 10 मिलियन डॉलर प्रति क्वार्टर के एक्सपोर्ट पर कॉस्ट प्रेशर कम होगा और प्राइसिंग में थोड़ी अतिरिक्त राहत मिलेगी।
सेक्टर लेवल ट्रेंड और शॉर्ट टर्म मूवमेंट
इंडिया‑US ट्रेड डील के बाद स्टील, ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग जैसे सेगमेंट में डिमांड बढ़ने की उम्मीद की जा रही है, जिससे डाउनस्ट्रीम स्टील कॉन्सम्पशन भी तेज हो सकता है। कई ब्रोकरेज और फंड मैनेजर मानते हैं कि ऑटो कंपोनेंट एक्सपोर्टर्स की EBITDA मार्जिन अगले 12–24 महीनों में 2–4 प्रतिशत तक सुधर सकती है, अगर टैरिफ कट स्थिर रहे और कंपनियां कैपेक्स बढ़ाकर क्षमता में इजाफा करें। इस तरह भारत फोर्ज, सोना BLW, SAMIL और अन्य ऑटो‑एंसिलरी स्टॉक्स पर मार्केट की नजर है और शॉर्ट टर्म में इन शेयरों में तेज प्राइस मूवमेंट देखने को मिल सकता है, अगर नतीजे और ऑर्डर फ्लो उम्मीद के अनुसार रहे।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।






