Green Hydrogen में सरकार का ₹8 लाख करोड़ निवेश का ऐलान! इन कंपनियों को होगा तगड़ा प्रोफिट, शेयरहोल्डर भी होंगे मालामाल….

नेशनल Green Hydrogen मिशन के तहत सरकार का अनुमान है कि इस सेक्टर में कुल 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आ सकता है, जिससे लाखों नई नौकरियां बनने और ऊर्जा आयात बिल घटने की उम्मीद है। इस मिशन का लक्ष्य 2030 तक हर साल कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का है, जिसके लिए लगभग 125 गीगावॉट नई अक्षय ऊर्जा क्षमता जोड़ने की जरूरत होगी।

नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के मुख्य लक्ष्य

मिशन का उद्देश्य भारत को Green Hydrogen उत्पादन और एक्सपोर्ट हब बनाना है, ताकि पेट्रोलियम, गैस और अमोनिया जैसे आयातों पर निर्भरता कम हो सके। सरकारी अनुमान के अनुसार, इस मिशन से सालाना 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के जीवाश्म ईंधन आयात को बचाया जा सकता है और करीब 50 मिलियन मीट्रिक टन तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाया जा सकता है। इसके लिए SIGHT प्रोग्राम, पीएलआई स्कीम और पायलट प्रोजेक्ट्स के जरिए इलेक्ट्रोलाइजर मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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कितनी फंडिंग और क्या प्रोत्साहन

केंद्र सरकार ने Green Hydrogen मिशन के लिए लगभग 19,744 करोड़ रुपये की शुरुआती आउटले की मंजूरी दी है, जिसमें से लगभग 17,490 करोड़ रुपये SIGHT प्रोग्राम के लिए रिजर्व हैं। इसके अलावा करीब 1,466 करोड़ रुपये पायलट प्रोजेक्ट्स और 400 करोड़ रुपये रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए रखे गए हैं, ताकि नई टेक्नोलॉजी और उपयोग के नए मॉडल विकसित किए जा सकें। Green Hydrogen और इलेक्ट्रोलाइजर मैन्युफैक्चरिंग के लिए अलग-अलग पीएलआई स्कीम भी शुरू की गई हैं, जिनमें इलेक्ट्रोलाइजर पर शुरुआती सालों में प्रति किलोवाट पर हजारों रुपये की इंसेंटिव सब्सिडी दी जा रही है।

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किन कंपनियों पर बाजार की नजर

Green Hydrogen में सबसे ज्यादा चर्चा NTPC, इंडियन ऑयल, L&T, JSW Energy, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अडानी ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियों की है जो बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स और JV की घोषणा कर चुकी हैं। अडानी और TotalEnergies मिलकर गुजरात में दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं, जिसमें अगले दस साल में करीब 50 अरब डॉलर यानी 4 लाख करोड़ रुपये तक निवेश की संभावना बताई जा रही है। JSW Energy, टाटा समूह और कई PSU कंपनियां स्टील, रिफाइनरी, फर्टिलाइज़र और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए ग्रीन हाइड्रोजन का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करने की दिशा में MoU और पायलट प्रोजेक्ट्स चला रही हैं।

Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।

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