Solar sector : भारत ने COP26 में 2030 तक 500 गीगावाट नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता का लक्ष्य रखा है, जिसमें बड़ा हिस्सा सोलर से आने वाला है। सरकार की योजनाएं जैसे PM Surya Ghar और PM Kusum ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में सोलर की मांग बढ़ा रही हैं, जिससे सोलर कंपनियों की ऑर्डरबुक तेजी से भर रही है।
Waaree Energies: सबसे बड़ी ऑर्डर बुक
Waaree Energies देश की अग्रणी सोलर मॉड्यूल निर्माता और EPC प्लेयर है। Money9 के आर्टिकल के मुताबिक कंपनी की ऑर्डर बुक 27 प्रतिशत बढ़कर लगभग 47,000 करोड़ रुपये से 60,000 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है, जो अगले कुछ सालों के लिए मजबूत रेवेन्यू विजिबिलिटी दिखाती है। जनवरी 2026 में कंपनी को 105 मेगावाट के नए सोलर मॉड्यूल ऑर्डर मिले हैं, जो 2025-26 में सप्लाई होने हैं और इससे प्रोजेक्ट पाइपलाइन और मजबूत हुई है।
Premier Energies: तेज ऑर्डर बुक ग्रोथ
Premier Energies ने हाल के समय में सबसे तेज ग्रोथ दिखाई है। कंपनी की ऑर्डर बुक 77 प्रतिशत उछलकर 5.3 गीगावाट से 9.4 गीगावाट पहुंच गई है, जो बताती है कि घरेलू और इंटरनेशनल दोनों मार्केट से इसे लगातार नए प्रोजेक्ट मिल रहे हैं। बढ़ती क्षमता, मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग में निवेश और बड़े सोलर पार्कों से मिलने वाले ऑर्डर आने वाले 2-3 साल में कंपनी के बिजनेस को निरंतर सपोर्ट कर सकते हैं
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एमवी फोटावोल्टिक: मजबूत मांग और डबल ऑर्डर
बेंगलुरु बेस्ड एमवी फोटावोल्टिक कंपनी की ऑर्डर बुक में 93 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़त दर्ज हुई है। कंपनी की बुक 4.8 गीगावाट से बढ़कर 9.3 गीगावाट हो गई है, जो utility scale प्रोजेक्ट्स में इसकी मजबूत पकड़ का संकेत देती है। इतनी बड़ी ऑर्डर बुक का मतलब है कि 2026-28 के बीच कंपनी के पास इंस्टॉलेशन और मॉड्यूल सप्लाई के लिए लगातार काम रहेगा, जिससे रेवेन्यू और कैश फ्लो दोनों को सहारा मिल सकता है।
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Vikram Solar: स्थिर लेकिन धीमी बढ़त
विक्रम सोलर भी भारतीय सोलर सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में से एक है। इसकी ऑर्डर बुक 10.3 गीगावाट से बढ़कर 10.6 गीगावाट हुई है, यानी सिर्फ 3 प्रतिशत की बढ़त, जो बाकी कंपनियों की तुलना में धीमी मानी जा सकती है। यह डेटा दिखाता है कि जहां सेक्टर में समग्र रूप से मांग मजबूत है, वहीं हर कंपनी की ग्रोथ स्पीड अलग है और प्रोजेक्ट जीतने की क्षमता पर निर्भर करती है।
2026-28 के लिए सेक्टर का ओवरऑल नजरिया
सोलर मॉड्यूल की लागत में गिरावट, सरकार की नीति सपोर्ट और 2030 के क्लीन एनर्जी टारगेट की वजह से इन कंपनियों की मोटी ऑर्डर बुक 2026-28 तक राजस्व का मजबूत बेस दे सकती है। वॉरी एनर्जी, प्रीमियर एनर्जी, एमवी फोटावोल्टिक और विक्रम सोलर जैसी कंपनियों के पास गीगावाट लेवल के प्रोजेक्ट्स लाइन में हैं, जो आने वाले वर्षों में सोलर सेक्टर को भारत के एनर्जी मैप पर और भी महत्वपूर्ण बना सकते हैं।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।






