भारत तेजी से Semiconductor हब बनने की तैयारी में है और भारत सरकार का India Semiconductor Mission 2.0 यानी ISM 2.0 इस बदलाव की रीढ़ बन गया है। इस मिशन का लक्ष्य है कि भारत चिप मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और सप्लाई चेन में दुनिया के भरोसेमंद प्लेयर के रूप में उभरे।
ISM 2.0 क्या है और क्यों जरूरी है
ISM 2.0 के तहत फोकस सिर्फ चिप फैब्रिकेशन पर नहीं बल्कि पूरे वैल्यू चेन पर है – यानी मशीनें, केमिकल, गैस, मटेरियल, डिजाइन IP और रिसर्च सबको शामिल किया गया है। सरकार ने ISM 1.0 के तहत पहले ही 76,000 करोड़ रुपये की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम से सिलिकॉन फैब और पैकेजिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी, जबकि ISM 2.0 के लिए 2026–27 के लिए अलग से 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। मकसद यह है कि भारत की आयात निर्भरता कम हो और इलेक्ट्रॉनिक्स, EV, डिफेंस व AI सेक्टर के लिए घरेलू स्तर पर भरोसेमंद चिप सप्लाई तैयार हो सके।
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भारत का Semiconductor बाजार
भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट 2023 में लगभग 38 अरब डॉलर के आसपास था और 2024–25 में यह 45–50 अरब डॉलर के दायरे में पहुंच चुका है। अनुमान है कि 2030 तक यही बाजार 100–110 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, यानी आने वाले कुछ सालों में दमदार डबल ग्रोथ की संभावनाएं दिख रही हैं। एक अन्य इंडस्ट्री रिपोर्ट के मुताबिक FY2024 में भारतीय सेमीकंडक्टर बाजार करीब 32.7 अरब डॉलर का था और FY2032 तक यह 67.4 अरब डॉलर तक जाने का अनुमान है, जिसमें लगभग 9.5% की सालाना ग्रोथ धारण की गई है।
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ISM 2.0 से जुड़ी कंपनियां कैसे बन रही हैं बादशाह
सरकार की इस पॉलिसी सपोर्ट से डिजाइन, R&D, मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग में काम करने वाली भारतीय कंपनियों को बड़ा फायदा मिल रहा है। ISM से जुड़े प्रोजेक्ट्स में 1.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव मंजूर किए जा चुके हैं, जिनसे अलग–अलग राज्यों में चिप फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर और एडवांस पैकेजिंग यूनिट्स लग रही हैं। इन प्रोजेक्ट्स के पूरी क्षमता पर चलने पर अनुमान है कि अगले 5–7 साल में भारत सालाना 10–15 अरब चिप्स घरेलू स्तर पर बना सकेगा, जो आज की 18 अरब चिप्स की इम्पोर्ट डिमांड का 55–80% तक हिस्सा कवर कर सकता है।
निवेशकों की नजर में सेमीकंडक्टर स्टॉक्स का क्रेज
चिप इकोसिस्टम में काम करने वाली भारतीय लिस्टेड कंपनियां – जैसे डिजाइन, EMS, और स्पेशलाइज्ड इलेक्ट्रॉनिक्स वाली फर्में – ISM 2.0 और तेजी से बढ़ती मांग के कारण चर्चा में हैं। कई बड़ी कंपनियां लगभग कर्ज़–मुक्त बैलेंस शीट, मजबूत रिटर्न ऑन इक्विटी और स्थिर कैश फ्लो के दम पर लांग टर्म ग्रोथ के लिए तैयारी कर रही हैं, जिसका सीधा असर उनके शेयरों की रेटिंग और वैल्यूएशन पर दिखता है। जैसे–जैसे भारत स्मार्टफोन, EV, डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और AI सर्वर जैसी कैटेगरी में आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहा है, सेमीकंडक्टर से जुड़ी कंपनियों की रेवेन्यू विजिबिलिटी और ऑर्डर बुक भी मजबूत होती जा रही है।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।







