Power Sector : भारत की कुल इंस्टॉल्ड बिजली क्षमता 2014 के 249 गीगावॉट से बढ़कर 2025 के अंत तक करीब 500.89 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है, जिसमें 50% से ज्यादा हिस्सा नॉन-फॉसिल फ्यूल सोर्सेज का है। पावर मंत्रालय और हाल के अनुमानों के मुताबिक 2032 तक बिजली सेक्टर में लगभग 4.5–5 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश होने की संभावना है, जिसका मकसद नई क्षमता जोड़ना, ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत करना और एनर्जी स्टोरेज को बढ़ावा देना है।
बढ़ती मांग, नई क्षमता और सरकार की रणनीति
नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्लान के अनुसार भारत की पीक बिजली डिमांड 2025 के करीब 273 गीगावॉट से बढ़कर 2031-32 तक लगभग 366 गीगावॉट तक पहुंच सकती है, यानी करीब 34% की बढ़ोतरी। इस मांग को पूरा करने के लिए 2031-32 तक कुल इंस्टॉल्ड क्षमता को लगभग 900 गीगावॉट तक ले जाने का अनुमान है, जिसमें बड़े स्तर पर रिन्यूएबल, थर्मल और न्यूक्लियर प्रोजेक्ट शामिल होंगे। ट्रांसमिशन सेक्टर में भी 2027 से 2032 के बीच करीब 76,787 सर्किट किलोमीटर नई लाइनों और लगभग 4,97,855 MVA अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी जोड़ने की योजना है।
Adani, Tata जैसे दिग्गज और सेक्टर की मौजूदा तस्वीर
2025 तक भारत की कुल इंस्टॉल्ड क्षमता में नॉन-फॉसिल फ्यूल आधारित स्रोतों (सोलर, विंड, हाइड्रो, न्यूक्लियर) की हिस्सेदारी 51% से अधिक हो चुकी है, जबकि फॉसिल फ्यूल्स की हिस्सेदारी लगभग 49% रह गई है। Adani समूह की कंपनियां थर्मल के साथ रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स में तेजी से कैपेक्स बढ़ा रही हैं, वहीं Tata Power जेनरेशन, डिस्ट्रीब्यूशन और सोलर रूफटॉप में मजबूत पोजिशन बना चुकी है। IBEF और अन्य अनुमानों के मुताबिक 2032 तक केवल पावर जेनरेशन इंडस्ट्री में ही लगभग 33 लाख करोड़ रुपये के कुल निवेश और करीब 38 लाख प्रोफेशनल्स की जरूरत पड़ सकती है, जो सेक्टर की लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी को दिखाता है।
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10X थीम: रिन्यूएबल, ग्रिड और स्टोरेज कंपनियों के मौके
2025 में अकेले रिन्यूएबल एनर्जी में रिकॉर्ड 40–45 गीगावॉट के आसपास नई क्षमता जोड़ी गई, जिससे भारत की कुल रिन्यूएबल क्षमता (लार्ज हाइड्रो सहित) 250–255 गीगावॉट के स्तर के करीब पहुंच गई है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार कुल नॉन-फॉसिल इंस्टॉल्ड क्षमता 2025 के अंत तक लगभग 256 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है, जो कुल बिजली क्षमता का आधे से ज्यादा हिस्सा है।
पिछले कुछ सालों में सोलर मॉड्यूल, विंड इक्विपमेंट, ट्रांसफॉर्मर, ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी से जुड़े कई मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स ने 500% से लेकर 6000% तक रिटर्न दिए हैं, जैसे Websol Energy System ने करीब पांच साल में 6000% से ज्यादा रिटर्न दिया है। यही ट्रेंड बताता है कि आने वाले समय में प्रोडक्शन, ट्रांसमिशन, एनर्जी स्टोरेज और डिजिटल ग्रिड सॉल्यूशन वाली कंपनियों में तेज ग्रोथ की संभावना बन सकती है, अगर वे मजबूत फंडामेंटल और सेक्टर की ग्रोथ के साथ तालमेल बनाए रखें।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।








