AI Sector : भारत अगले 10–12 साल में लगभग 250 अरब डॉलर (करीब 20.7 लाख करोड़ रुपये) के AI इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है, जिसमें डेटा सेंटर, पावर, ट्रांसमिशन और क्लाउड सर्विसेज शामिल हैं। सरकार और प्राइवेट सेक्टर मिलकर AI को नई “इंटेलिजेंस इकोनॉमी” का आधार बनाने पर काम कर रहे हैं, जिससे जीडीपी में डिजिटल इकॉनमी का योगदान 11.74% से बढ़कर 20% तक पहुंचने का अनुमान है।
डेटा सेंटर क्षमता और ग्रोथ का अनुमान
अभी भारत की डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1.5 गीगावाट है, जिसे 2035 तक 14 गीगावाट तक बढ़ाने का अंदाजा है, यानी करीब 20% की सालाना ग्रोथ रेट से। दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक डेटा सेंटर मार्केट 57.67 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है और क्षमता 6.5 गीगावाट के आसपास हो सकती है, जिसमें AI और क्लाउड की मांग सबसे बड़ा ड्राइवर होगी। इसी तेज ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए सरकार डेटा सेंटर के लिए लंबी अवधि की टैक्स छूट और पॉलिसी सपोर्ट दे रही है, ताकि ग्लोबल कैपिटल और टेक कंपनियां यहां निवेश बढ़ाएं।
Adani Group का 100 अरब डॉलर AI डेटा सेंटर दांव
अडानी ग्रुप ने अकेले 2035 तक रिन्यूएबल पावर से चलने वाले हाइपरस्केल AI डेटा सेंटर्स पर 100 अरब डॉलर निवेश करने की योजना घोषित की है। यह प्लेटफॉर्म 5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता बनाने का लक्ष्य रखता है और इसके साथ सर्वर मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस इलेक्ट्रिकल इंफ्रा और क्लाउड प्लेटफॉर्म में अतिरिक्त 150 अरब डॉलर निवेश को ट्रिगर कर सकता है, जिससे कुल AI इंफ्रा इकोसिस्टम 250 अरब डॉलर के आसपास पहुंचने का अनुमान है। AdaniConnex की मौजूदा 2 गीगावाट क्षमता को 5 गीगावाट तक बढ़ाने की प्लानिंग है और समूह Google के साथ विशाखापट्टनम व Noida में गीगावाट-स्केल AI डेटा सेंटर कैंपस पर काम कर रहा है।
Read More : Dharan Infra Share Price Target 2026, 2028, 2030, 2032, 2034, 2035…
TATA, L&T और ग्लोबल टेक पार्टनर्स की भूमिका
TATA ग्रुप डेटा सेंटर, क्लाउड और IT सर्विसेज के जरिए AI इंफ्रा ग्रोथ का बड़ा हिस्सा कैप्चर कर रहा है, जहां TCS और TATA कम्युनिकेशंस जैसी कंपनियां एंटरप्राइज AI, क्लाउड होस्टिंग और नेटवर्किंग सॉल्यूशंस पर फोकस कर रही हैं। एलएंडटी इंजीनियरिंग, EPC प्रोजेक्ट्स और हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन नेटवर्क के जरिए डेटा सेंटर पार्क, सबस्टेशन और पावर इंफ्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे AI क्लस्टर्स के लिए जरूरी बिजली और ग्रिड कनेक्टिविटी मिलती है।
दूसरी ओर Google के 15 अरब डॉलर, Microsoft के 17.5 अरब डॉलर और Amazon के 35 अरब डॉलर के भारत-केंद्रित प्लान से क्लाउड और AI इंफ्रा में 200 अरब डॉलर तक की पाइपलाइन बन रही है, जिसमें देसी पावर, ट्रांसमिशन और कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए बड़ा ऑर्डर बुक अवसर है।
Read More : रेलवे कंपनी को KAVACH 4.0 से मिला बड़ा आर्डर! 6 महीने में 100% भागा शेयर, सोमवार को फोकस में रहेगा…
पावर, ग्रीन एनर्जी और AI स्टॉक्स में संभावनाएं
AI डेटा सेंटर्स बिजली की खपत तेजी से बढ़ाएंगे, जहां 2025 में डेटा सेंटर्स द्वारा देश की कुल बिजली का लगभग 0.5% उपयोग किया गया और 2030 तक इसमें 100% से ज्यादा बढ़ोतरी का अनुमान है। अडानी ग्रीन की 30 गीगावाट खवड़ा रिन्यूएबल प्रोजेक्ट में से 10 गीगावाट से ज्यादा क्षमता पहले ही चालू है, जो भविष्य के AI डेटा सेंटर्स को क्लीन पावर सप्लाई देने की रीढ़ मानी जा रही है। इस पूरे AI इंफ्रा बूम से डेटा सेंटर डेवलपर्स, रिन्यूएबल एनर्जी प्रोड्यूसर्स, ट्रांसमिशन यूटिलिटीज और EPC कंपनियों के ऑर्डर और रेवेन्यू में आने वाले दशक में मजबूत CAGR देखने की संभावना बन रही है।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।








