Defense कंपनी को मिला ₹50,00,00,00,000 का मेगा आर्डर! शेयर तुफानी तेजी जारी..

सरकारी Defense शिपयार्ड कंपनी Cochin Shipyard Limited (CSL) को रक्षा मंत्रालय की तरफ से करीब ₹5,000 करोड़ के नेवी प्रोजेक्ट में L1 यानी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी घोषित किया गया है। यह ऑर्डर भारतीय नौसेना के लिए 5 Next Generation Survey Vessels (NGSV) बनाने के लिए है, जो कंपनी की ऑर्डर बुक और भविष्य की ग्रोथ के लिए बड़ा पॉजिटिव माना जा रहा है।

NGSV प्रोजेक्ट और कॉन्ट्रैक्ट की खास बातें

इस टेंडर के तहत Cochin Shipyard भारतीय नौसेना के लिए 5 एडवांस्ड Next Generation Survey Vessels तैयार करेगी, जो समुद्री सर्वे, नेविगेशन चार्टिंग और स्ट्रैटेजिक डिफेंस ऑपरेशंस में इस्तेमाल होंगी। फिलहाल कंपनी को L1 स्टेटस मिला है और फाइनल कॉन्ट्रैक्ट रक्षा मंत्रालय की औपचारिक मंजूरी और आगे की प्रक्रियाओं के बाद साइन होगा, लेकिन अनुमानित वैल्यू लगभग ₹5,000 करोड़ बताई गई है।

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कंपनी की वर्तमान ऑर्डर बुक और Defense फोकस

Cochin Shipyard पहले से ही डिफेंस और कमर्शियल शिपबिल्डिंग दोनों सेगमेंट में एक्टिव है और इसकी ऑर्डर बुक में ज्यादातर ऑर्डर नौसेना और कोस्ट गार्ड से जुड़े प्रोजेक्ट्स के हैं। Equitymaster के डेटा के मुताबिक, FY26 की शुरुआत में कंपनी की कुल ऑर्डर बुक लगभग ₹21,100 करोड़ (₹211 अरब) के आसपास थी, जिसमें डिफेंस सेगमेंट की हिस्सेदारी प्रमुख है, और नया NGSV कॉन्ट्रैक्ट मिलने पर यह और मजबूत होगी।

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हालिया नतीजे, रेवेन्यू ग्रोथ और मार्जिन

Q3 FY26 में Cochin Shipyard का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू लगभग 17.7% सालाना बढ़कर ₹1,350 करोड़ के आसपास पहुंच गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह लगभग ₹1,148 करोड़ था। हालांकि नेट प्रॉफिट में दबाव दिखा और यह करीब 18.3% घटकर ₹144–145 करोड़ के आसपास रहा, साथ ही ऑपरेटिंग मार्जिन 22% से गिरकर लगभग 17% और नेट मार्जिन 15% से घटकर लगभग 11% पर आ गया।

शेयर प्राइस में तुफानी तेजी और मार्केट सेंटिमेंट

NGSV प्रोजेक्ट में L1 घोषित होने की खबर के बाद Cochin Shipyard के शेयर में तेज खरीदारी देखी गई और स्टॉक में इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान 7% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का ध्यान एक बार फिर डिफेंस शिपबिल्डिंग थीम पर गया। ब्रोकरेज और मार्केट एक्सपर्ट इस ऑर्डर को लंबे समय के लिए रेवेन्यू विजिबिलिटी बढ़ाने वाला फैक्टर मान रहे हैं, क्योंकि नेवी शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट आम तौर पर कई साल तक चलते हैं और कंपनियों को स्थिर कैश फ्लो और मजबूत एग्जिक्यूशन ट्रैक रिकॉर्ड बनाने का मौका देते हैं।

Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।

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