Power stock : BSE 1000 में शामिल KPI Green Energy का शेयर अपने 52 वीक हाई से करीब 29 प्रतिशत नीचे चल रहा है और इस पर ब्रोकरेज हाउस एसबीआई सिक्योरिटीज ने करीब 40 प्रतिशत अपसाइड का टारगेट दिया है। इस वजह से यह स्टॉक पावर सेक्टर में डिस्काउंट पर मिल रहे बेहतर विकल्पों में गिना जा रहा है।
ब्रोकरेज का अपसाइड टारगेट
एसबीआई सिक्योरिटीज ने KPI Green Energy के शेयर पर खरीद की रेटिंग देते हुए 560 रुपए प्रति शेयर का टारगेट प्राइस तय किया है। फिलहाल शेयर का भाव करीब 401.60 रुपए के आसपास है, यानी यहां से लगभग 40 प्रतिशत तक संभावित अपसाइड की गुंजाइश मानी जा रही है। स्टॉक का 52 वीक हाई 562.60 रुपए और 52 वीक लो 335.55 रुपए दर्ज है, जिससे पता चलता है कि शेयर हाई से अभी भी अच्छी खासी गिरावट पर ट्रेड कर रहा है।
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Q3 FY26 रिजल्ट और ग्रोथ के आंकड़े
दिसंबर तिमाही Q3FY26 में KPI Green Energy ने कंसोलिडेटेड रेवेन्यू, EBITDA और PAT में जोरदार वृद्धि दिखाई है। कंपनी का रेवेन्यू 44.6 प्रतिशत बढ़कर 663 करोड़ रुपए, EBITDA 72.2 प्रतिशत उछलकर 236 करोड़ रुपए और PAT 39.4 प्रतिशत बढ़कर 118 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। तिमाही के दौरान यूनिट जेनरेशन 31.1 प्रतिशत सालाना और 35.6 प्रतिशत तिमाही आधार पर बढ़कर 80 मिलियन यूनिट रहा, हालांकि प्रोजेक्ट्स के कमर्शियलाइजेशन में देरी की वजह से यह कंपनी के अपने लक्ष्य से कम रहा।
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CPP और IPP बिजनेस, ऑर्डर बुक की स्थिति
KPI Green Energy का रेवेन्यू ग्रोथ मुख्य रूप से Captive Power Producer (CPP) वर्टिकल से आया है, जहां मजबूत एक्जिक्यूशन के कारण सालाना आधार पर 52 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई है। इस दौरान कंपनी ने 88 मेगावॉट के CPP प्रोजेक्ट्स डिलीवर किए, जो सालाना 96 प्रतिशत और तिमाही 2 प्रतिशत अधिक हैं। Independent Power Producer (IPP) सेगमेंट में रेवेन्यू में भले ही सालाना 9.5 प्रतिशत कमी आई, लेकिन सीजनैलिटी के कारण 16.9 प्रतिशत तिमाही ग्रोथ के साथ यह 60 करोड़ रुपए तक पहुंचा।
लंबी अवधि की ग्रोथ, रेवेन्यू और क्षमता
दिसंबर 2025 तक KPI Green Energy की कुल ऑर्डर बुक लगभग 3.6 गीगावॉट है, जिसमें 1.6 गीगावॉट IPP और 2.0 गीगावॉट CPP ऑर्डर शामिल हैं। ब्रोकरेज के अनुसार CPP ऑर्डर अगले 18–20 महीनों में और IPP ऑर्डर FY28 तक पूरे होने की उम्मीद है। KPI Green Energy के पास 31 दिसंबर 2025 तक 528 मेगावॉट की ऑपरेशनल IPP कैपेसिटी है और अगले 24–30 महीनों में इसे 2 गीगावॉट तक बढ़ाने की योजना है, जिससे सालाना 1,000 करोड़ रुपए से अधिक रेवेन्यू की संभावना जताई जा रही है।
शेयरहोल्डिंग पैटर्न और प्रमोटर होल्डिंग
शेयरहोल्डिंग के ताजा आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 तिमाही में प्रमोटर की हिस्सेदारी बढ़कर 49.3 प्रतिशत हो गई है, जो सितंबर 2025 में 48.7 प्रतिशत थी। इसी अवधि में FII की होल्डिंग 9.2 प्रतिशत से घटकर 8.7 प्रतिशत पर आ गई, जबकि अन्य इंस्टीट्यूशन की हिस्सेदारी 0.6 प्रतिशत और पब्लिक तथा अन्य निवेशकों की हिस्सेदारी 41.4 प्रतिशत रही। प्रमोटर द्वारा हिस्सेदारी बढ़ाना कंपनी के प्रति आंतरिक भरोसे का संकेत माना जाता है, जो स्टॉक पर ब्रोकरेज के बुलिश व्यू के साथ मेल खाता है।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।






