ये Solar कंपनी देश की अग्रणी सोलर और ऊर्जा स्टोरेज कंपनी है, जो अब लिथियम-आयन बैटरी निर्माण में बड़ा निवेश करने जा रही है। कंपनी आंध्र प्रदेश के अनकापल्लि जिले के रांबिली क्षेत्र में लगभग ₹8,175 करोड़ की लागत से गीगाफैक्ट्री लगाने की तैयारी में है। यह प्लांट 16 GWh क्षमता वाला होगा, जहां सेल मैन्युफैक्चरिंग से लेकर बैटरी पैक और बड़े बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) तक पूरी वैल्यू चेन तैयार की जाएगी। इस प्रोजेक्ट से अकेले इसी क्षेत्र में लगभग 3,000 लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है।
ऑर्डर बुक ₹65,000 करोड़ के पार, सोलर बिजनेस की स्थिति
Waaree Energies पहले से ही सोलर मॉड्यूल और प्रोजेक्ट सेगमेंट में मजबूत ऑर्डर बुक रखती है। हाल के महीनों में कंपनी को 500 मेगावाट के सोलर मॉड्यूल सप्लाई जैसे कई बड़े ऑर्डर मिले हैं, जो वित्त वर्ष 2026-27 के भीतर सप्लाई होने हैं। पहले उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कंपनी की कुल ऑर्डर बुक 20–24 GW क्षमता के आसपास थी,
जिसकी वैल्यू करीब ₹47,000 करोड़ बताई गई थी, जो नई डील्स और बैटरी प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद और मजबूत हो रही है। नई बैटरी गीगाफैक्ट्री और लगातार मिल रहे मॉड्यूल ऑर्डर को मिलाकर कंपनी का ओवरऑल आर्डर विजिबिलिटी हजारों मेगावाट और दर्जनों हजार करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच चुका है।
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Waaree Energies : बैटरी गीगाफैक्ट्री के टेक्निकल और पॉलिसी पहलू
आंध्र प्रदेश सरकार के स्टेट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट को इन-प्रिंसिपल मंजूरी दे दी है, जिसके बाद जमीन आवंटन, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंसेंटिव पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है। 16 GWh की यह क्षमता इलेक्ट्रिक वाहनों, ग्रिड-स्केल स्टोरेज और सोलर-पावर प्रोजेक्ट्स के लिए बैटरी की बड़ी जरूरत को पूरा कर सकती है।
कंपनी इससे पहले बोर्ड मीटिंग में बैटरी सेल और BESS क्षमता को लगभग 3.5 GWh से बढ़ाकर 20 GWh तक ले जाने की योजना मंजूर कर चुकी है, जिससे यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी गीगाफैक्ट्री के रूप में उभर सकता है। यह निवेश भारत की ऊर्जा स्टोरेज क्षमता बढ़ाने और रिन्यूएबल एनर्जी के बेहतर उपयोग में अहम भूमिका निभाएगा।
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हालिया वित्तीय प्रदर्शन और ग्रोथ
कंपनी का हालिया क्वार्टर वित्तीय प्रदर्शन भी मजबूत रहा है, जिससे बड़े प्रोजेक्ट पर खर्च करने की क्षमता बढ़ी है। एक तिमाही में कंपनी की रेवेन्यू लगभग 70–136 प्रतिशत तक की सालाना वृद्धि के साथ कई हजार करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंची है और नेट प्रॉफिट में भी 2 गुना से ज्यादा उछाल देखा गया है। EBITDA मार्जिन करीब 18–25 प्रतिशत की रेंज में रहा है,
जो मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस के लिए स्वस्थ माना जाता है। साथ ही 9 महीनों की अवधि में रेवेन्यू और प्रॉफिट दोनों में करीब 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि ने यह संकेत दिया है कि कंपनी के पास कैश फ्लो और फंडिंग की पर्याप्त क्षमता मौजूद है, जिससे बड़े कैपेक्स प्रोजेक्ट आराम से संभाले जा सकते हैं।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।







