Tata Group की स्टील कंपनी Tata Steel ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में जबरदस्त प्रदर्शन किया है, जिसमें कंपनी का शुद्ध मुनाफा पिछले साल के मुकाबले करीब 8 गुना बढ़ गया।
मुनाफे में 723% की जोरदार छलांग
दिसंबर 2025 खत्म तिमाही में Tata Steel का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट बढ़कर लगभग 2,689 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले साल इसी तिमाही के करीब 327 करोड़ रुपये के मुकाबले 723% की भारी छलांग है। नेट प्रॉफिट मार्जिन भी 0.55% से बढ़कर लगभग 4.8% के आसपास पहुंच गया, जो कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार दिखाता है। तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर मुनाफा 3,102 करोड़ रुपये से थोड़ा नीचे आया है, लेकिन साल-दर-साल ग्रोथ बहुत मजबूत रही।
राजस्व, EBITDA और मार्जिन में मजबूती
कंपनी की रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस Q3 FY26 में करीब 6% बढ़कर लगभग 56,646–57,002 करोड़ रुपये के दायरे में रही, जो पिछले साल की लगभग 53,200–53,648 करोड़ रुपये की रेवेन्यू से ज्यादा है। कंसॉलिडेटेड EBITDA भी बढ़कर करीब 8,270–8,276 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल के 7,155 करोड़ रुपये से काफी ऊपर है। ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन बढ़कर लगभग 14.6% हो गया, जो बेहतर लागत नियंत्रण और प्रोडक्ट मिक्स में सुधार का संकेत देता है।
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भारत में डिमांड और वॉल्यूम ग्रोथ
कंपनी के मुताबिक Q3 FY26 में भारत के ऑपरेशंस में स्टील की डिमांड मजबूत रही और प्रोडक्शन व डिलीवरी दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। भारत में Tata Steel की डिलीवरी पहली बार 6 मिलियन टन के आंकड़े को पार कर गई और लगभग 6.04 मिलियन टन के स्तर पर पहुंच गई। कुल सेल्स वॉल्यूम भी बढ़कर लगभग 8.21 मिलियन टन रहा, जो पिछले साल के 7.72 मिलियन टन से अधिक है। बेहतर रियलाइजेशन और हाई मार्जिन वाले सेगमेंट में फोकस ने कुल प्रदर्शन को और मजबूत बनाया।
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कर्ज स्थिति और FIIs की हिस्सेदारी
ताजा नतीजों के बाद Tata Steel मैनेजमेंट का फोकस नेट डेब्ट को कम करने और बैलेंस शीट को मजबूत रखने पर है, जिस वजह से कंपनी पर कर्ज का बोझ लगातार घट रहा है और आने वाले समय में कर्ज-मुक्त या बहुत कम कर्ज वाली स्थिति की ओर बढ़ने की रणनीति पर काम हो रहा है। शेयरहोल्डिंग डेटा के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी में प्रमोटर की हिस्सेदारी करीब 33.19% है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की हिस्सेदारी लगभग 17.49% और रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी करीब 21.68% है। म्यूचुअल फंड्स की होल्डिंग लगभग 14.64% और इंश्योरेंस कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 10.23% दर्ज की गई है, जो क्वालिटी इंस्टिट्यूशनल इंटरेस्ट को दिखाती है।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।






